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कर्ण पिशाचिनी | Karn Pishachini | Scary Stories | Horror Stories | Bhoot Ki Kahani | Pishach

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Karn Pishachini

ये कहानी है शायरा की, जिसे अगर मैं शापित शायरा कहूँ तो कुछ भी गलत नहीं होगा… क्योंकि उसे एक ऐसा श्राप मिला था, जिसके बोझ तले जीने से अच्छा उसने चुना, मौत को !… अब हर दिन एक नये मर्द से सम्भोग की पीड़ा कोई कैसे झेल सकता है…. मैं पिछले 10 साल से भूत, पिशाच और काले शक्तियों पर रिसर्च कर रहा हूँ… पर जो हाल मैंने शायरा का देखा, उसके बाद मैं यही कहूंगा कि ऐसा किसी और के साथ न हो।

बात तब की है, जब शायरा अपने कॉलेज के पहले साल में थी…  रंग सांवला और चेहरे पर चेचक के निशान… जिसे देखकर कोई भी अपनी नजरे फेर ले… कॉलेज में स्टूडेंट से लेकर लगभग हर प्रोफेसर तक शायरा को इग्नोर करते  थे। जिस वजह से वह भीड़ में भी खुद को काफी अकेला महसूस करती थी… पर  उसके  शरीर की बनावट ऐसी थी जिसे देख हर मर्द का जी मचल जाये । पर उसका चेहरा देख कोई मर्द उसे अपने करीब नहीं आने देता, बस यही कहता।     “क्या फायदा इतने आकर्षक शरीर का, जब शक्ल ही भूतों वाली है।

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शायरा को अब खरी खोटी सुनने की आदत हो गयी थी।… वो किसी की बातो का कुछ जवाब नहीं देती, बस क्लास के कोने में बैठ अपने प्यार रौनी को छुप-छुप कर देखा करती।  पर दाग से भरे चेहरे के कारण उसे अपनी दिल की बात कहने में डर लगता था।

फिर एक दिन पता नही कैसे पर क्लास की बाकी लड़कियों को भी पता चल गया की शायरा ‘रौनी’ को पसंद करती है, जिसके बाद उन्होंने शायरा को घेर लिया और उसकी बुल्ली करने लगे, कोई उसके शक्ल पर ताना मारता, तो कोई उसकी फूटी किस्मत को कोसता… इतने में भीड़ से थोडा हटके खड़ा रौनी भी बोल पड़ता है,

 “पता नहीं इसने कैसे सोच लिया कि मैं इससे प्यार करूँगा ?”

अपने प्यार से ये बात सुन शायरा का दिल टूट गया, उसका प्यार आसु बन उसकी आँखों से बहने लगा था। जब शायरा से बर्दाश्त नहीं हुआ तो वो सबसे बचती हुई सीधे लाइब्रेरी की तरफ भाग गयी और एक कोने में बैठ सिसक-सिसक कर रोने लगी, उस वक़्त मैं लाइब्रेरी से अपने लिए कुछ बुक्स लेकर निकल ही रहा था… कि इतने में मुझे किसी के सिसकने की अवाज आई, मैं जब उसके पास पहुँचा तो देखा शायरा अपने आसुओं में सराबोर हो रखी हैं।  उस  वक़्त लाइब्रेरी में कोई नहीं था, इसलिए मैंने पहले उसे शांत कराया… जिसके बाद उससे रोने की वजह पूछी। मेरे इस एक सवाल पर शायरा ने अपना सारा दुःख मेरे सामने रखते हुए कहा।   

 “आखिर मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है…..  और मेरे चेहरे पर ही ऐसे दाग क्यों है? क्यों ऊपर वाले ने मुझे इतना बदसूरत बनाया है,  क्यों ?  काश मैं ये सब कुछ बदल पाती तो सब मुझ से भी प्यार करते”

शायरा की बात सुन मैंने उसे सँभालते हुए कहा।

‘अब इस बात का जवाब तो तुम्हे कर्ण पिशाचिनी’ ही दे सकती है, बाकी तुम्हें इन बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए… क्योंकि लोग दिल से सुन्दर होने चाहिए चेहरे से नहीं.” 

मैंने उसे इतना कुछ कह दिया पर शायरा का सारा ध्यान बस उस कर्ण पिशाचिनी पर ही था। जिसे सुन उसने मुझ से दोबारा पुछा-

“क्या सच में ‘कर्ण पिशाचिनी’ मेरे सभी सवालों का जवाब दे सकती है”…

“हाँ, कर्ण पिशाचिनी भूतकाल से वर्तमान तक के सभी सवालो का जवाब दे सकती है… पर उसकी सिद्धि बहुत ही कठिन होता है, जो तुम जैसे बच्चों के बस की बात नहीं है.” 

इतना कह कर मैं वहाँ से निकल गया, जाते-जाते मैंने बस इतना देखा कि वो बुक शेल्फ में कुछ ढूंढ रही थी। मैं उससे पूछने ही वाला था कि वो क्या ढूढ़ रही पर इतने में वो और अंदर चली गयी और मैं भी इस बात को महज़ एक इत्तेफाक समझ अपने काम में लग गया। फिर जैसे ही शायरा के तरफ मुड़ा.. तो वो वहाँ थी ही नहीं।

अगली सुबह जब मैं क्लास लेने के लिए पहुँचा तो मैंने देखा की शायरा एब्सेंट है, मुझे लगा की कल के बात को लेकर कॉलेज नहीं आई… लेकिन अगले कई दिन तक, क्लास की उसकी वो सीट खाली ही रही।

मुझे उसकी चिंता होने लगी इसलिए मैंने ऑफिस से उसके लैंडलॉर्ड को कॉल किया, तो पता चला की शायरा कई दिनों से अपने रूम से बाहर नहीं निकली… और उसके रूम से कुछ अजीब-अजीब सी आवाजें भी सुनाई देती है।

ये सब सुनने के बाद मैं सीधे लाइब्रेरी पहुंचा और मैंने जो देखा उसे देख मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गयी। कर्ण पिशाचिनी की सिद्धि वाली किताब गायब थी।  और उस दिन मेरे जाने के बाद शायरा भी तो यही कुछ ढूंढ रही थी।  अब धीरे धीरे मुझे किसी अनहोनी का एहसास होने लगा था। मैं समझ चुका था कि कर्ण पिशाचिनी की सिद्धि वाली किताब शायरा अपने साथ ले गयी हैं।…..

उसने पूरे २१ दिन की कड़ी साधना के बाद आख़िरकार कर्ण पिशाचनी की सिद्धि हासिल कर ली… कर्ण पिशाचनी अपने भयानक हँसी के साथ उसके सामने प्रकट हो गयी… (for स्टोरी बोर्ड एंड एनिमेटर- karn pishachni जिसके सिर पर मुकुट, शरीर दो रंगों में बटा हुआ और आँख चाँदी के तरह चमक रही थी। , जिसके कमर से निचे शरीर का हिस्सा काले धुँआ जैसा था) उसे देख शायरा ने अपने दोनों हाथ जोड़ लिए, वो खुश भी थी कि उसने आख़िरकार ये सिद्धि पूरी कर ली… साथ ही उसके मन में ये डर भी था की कही उसके किसी चुक से कर्ण पिशाचनी क्रोधित न हो जाए। की तभी कर्ण पिशाचिनी ने  शायरा के तरफ देखते हुए कहा,

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“बोल, क्या जानना है तुझे…  मैं सब बताउंगी… तेरी हर ख्वाहिश पूरी कर दूंगी, पर क्या तू बदले में मेरी एक शर्त पूरी कर पाएगी?”

शायरा ने बिना शर्त सुने, हाँ कह दिया… उसके बाद उसने अपने सारे सवाल उससे पूछ लिए, जिसका जवाब उसने शायरा को दे दिया… और फिर जाते-जाते कहा,

 “सदियों बाद कोई मुझे साधने में सफल हुआ है, जा अब मेरी शक्तियां तुझ में है… चुप-चाप अभी सो जा, सुबह उठते ही तेरी तक़दीर बदल जाएगी… लेकिन उस शर्त को हमेशा याद रखना, नहीं तो सब ख़त्म हो जायेगा… सब खत्म ”

इतना कहते ही कर्ण पिशाचिनी हवा में विलुप्त हो गयी…

अगली सुबह जब शायरा पूरे २१ दिन बाद कॉलेज आई तो उसे देख सब के होश उड़े के उड़े रह गये… क्योंकि जिस सांवला रंग और चेहरे पर दाग की वजह से सभी उसका मजाक उड़ाया करते थे… अब उसका कही नामो निशान नहीं था… वो सिर से लेकर पाँव तक अजंता की मूरत लग रही थी, जिसकी खूबसूरती पर कोई भी मोह जाएँ।

अब तक जो उससे नजरे फेरते रहते थे, वो अब शायरा के एक झलक पाने को बेताब रहने लगे… लेकिन शायरा अभी भी सिर्फ रौनी को चाहती है और उसने अपने दिल की बात रौनी को बता भी दी।  

रौनी भी अब उसके ख़ूबसूरती को मना नहीं कर पाया और दोनों साथ-साथ एक कपल की तरह रहने लगे… कई महीने बीत गये और अब वो दोनों एक दुसरे के काफी करीब आ चुके थे, लेकिन बीते कुछ महीने में रौनी ने ये नोटिस किया की… शायरा कभी उसके साथ रात के समय टाइम स्पेंड नहीं करती थी, न तो वो नाईट पार्टी में आती, और ना ही रात को कहीं उसके साथ बाहर जाती ।  शायरा उसके साथ सब कुछ करती है, पर सिर्फ दिन में और रात के 10 बजे के बाद तो उसने कभी शायरा को देखा ही नहीं।

इसलिए एक दिन रौनी जानबूझकर शायरा के साथ रात में मूवी देखने का प्लान करता है, और शायरा इस बार भी मना कर देती है।  इस पर रौनी शायरा से पूछता  है।

 “आखिर तुम रात को मेरे साथ क्यों नहीं रहना चाहती ?” 

शायरा गुस्से में लाल होकर कहती है।

 ”मैंने तुम्हें कितनी बार बताया है, कि ये रात में मिलने-मिलाने की सारी बाते कॉलेज खत्म होने की बाद होगी, फिर भी तुम ?” 

इतना कहते ही शायरा वहाँ से उठकर चली जाती है।  रौनी को शायरा का इस तरह से गुस्सा करना बहुत ही अजीब लगता है, इतना की उसके सिर से पसीना टपकने लगता है… लेकिन इस बार उसने भी ठान लिया कि आज वो इसके पीछे की वजह पता लगाकर ही रहेगा.

इसलिए वो शायरा को बिना बताये आधी रात में खिड़की से होते हुए उसके घर में पहुँच जाता है। पर शायरा तो अपने कमरे में थी ही नहीं। रौनी शायरा को ना पाकर बेचैन हो गया था। कि तभी रौनी को कही से मंत्र उच्चारण की आवाजें सुनाई देती है और वो उसी तरफ बढ़ जाता है… ये अवाज शायरा के बगल वाले कमरे से आ रही थी, जो रौनी के आने पर हमेशा बंद ही रहता था.

रौनी ने  सोचा आखिर शायरा इस कमरे में कर क्या रही है। जानने के लिए उसने जैसे ही खिड़की की दरार के बीच से अंदर देखा, तो उसकी आँखे फटी-की-फटी रह गयी।  और डर के मारे उसके पसीने छूटने लगे, क्योंकि अंदर शायरा वीभत्स रूप बनाये किसी तंत्र विद्या में व्यस्त थी… बाल पूरे बिखरे हुए और आँख बिलकुल कर्ण पिशाचनी के तरह जिसे देखकर किसी की भी रूह कांप जाए। और कमरे में एक अजीब सी रौशनी फैली हुई थी… जिससे वहाँ मौजूद सब कुछ जमीन से ऊपर हवा में तैरने लगा। सिर्फ सामान ही नहीं बल्कि खुद शायरा भी।  

ये सब कुछ रौनी के समझ से परे था… इसलिए वह वहाँ से उलटे पाँव भाग गया और जाते-जाते हड़बड़ी में एक फूल का गमला भी गिरा गया। रौनी तो भाग निकला था , पर गमले टूटने के वजह से शायरा की साधना टूट जाती है।  जिससे उसके शरीर के अंदर से कर्ण पिशाचिनी चीखते हुए बाहर निकल गयी ।

 “मेरे महीनों की तपस्या को भंग कर दिया इस रौनी ने, मैं उसे ज़िंदा नहीं छोडूंगी.” 

शायरा को कुछ समझ नहीं आता है, पर वो इतना समझ गयी थी कि  जिस दौरान कर्ण पिशाचिनी उसके शरीर में वास कर भविष्य देखने की शक्ति की सिद्धि हासिल कर रही थी.. उस दौरान किसी ने उसका ध्यान भंग कर दिया और वह रौनी था।

कर्ण पिशाचिनी ने उसे सब कुछ देने के बदले के शर्त में उससे उसका शरीर माँगा था, जिसमे वास कर वो अपनी साधना कर सके… लेकिन साधना भंग हो जाने की वजह से वह अब रौनी के खून की प्यासी बन गयी, क्योंकि अब उसे इस सिद्धि को वापस से करने में पूरे एक साल लगेंगे… शायरा कर्ण पिशाचिनी के क्रोध को देख गिड़गिड़ाते हुए बोली

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“ रौनी मेरा प्यार है, मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ। उसे छोड़ दे, बदले में मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ। “

उसकी बात सुन कर्ण पिशाचिनी ने कहा।  

“ठीक है अगर तुझे बलिदान देने का इतना ही शौक है, तो जा.. मैं तुझे श्राप देती हूँ… अगले 11 महीने तक हर रात तुझे एक नये मर्द के साथ सम्भोग करना होगा, नहीं तो तेरे प्यार की अर्थी उठ जाएगी”

ये कहते ही कर्ण पिशाचनी वहाँ से चली गयी, ये सुन शायरा भी  फुट-फुट कर रोने लगी। अब हर शाम वो न चाहते हुए भी बाहर जाती और एक नये मर्द के साथ वापस आती।  ये सिलसिला रोज चलने लगा था , शायरा के कॉलेज में ऐसा कोई लड़का नहीं बचा था… जिसे शायरा के घर का पता मालूम न हो.

एक शाम मुझे भी शायरा का  कॉल आया और उसके मुझे डिनर पर अपने घर बुलाया… डिनर के बाद उसने शर्म भरे नज़र से मुझ से सम्भोग करने की बात कही… मेरा तो दिमाग घूम गया, पहले तो मैं गुस्सा हो गया पर उसे फूट-फूट कर रोता देख… मेरा दिल पिघलने लगा… इसलिए मैंने उसे सँभाला और उससे बात की फिर उसने मुझे वो सब बताया जो उसके साथ घट रहा था।  उसने ये भी बताया की रौनी उससे ब्रेकअप कर चूका हैं। क्योंकि शायरा उसे कोई काला जादू करने वाली लगती है, पर आज भी शायरा सिर्फ उसके जान की सलामती के लिए हर रात खुद को नीलाम करती है और आज मेरी बारी है… जैसे-जैसे बात भूत पिशाच की होने लगी… तो मैं उसकी सारी बातें रिकॉर्ड करने लगा.

वैसे तो मैं शायरा की सारी बाते रिसर्च के लिए रिकॉर्ड कर रहा था, पर मुझे लगा की रौनी को भी पता होना चाहिए की कोई उससे कितना प्यार करता है.. इसलिए मैंने उसे ये रिकॉर्डिंग भेज दी , और बिना उसके साथ कुछ किये वहाँ से निकलने लगा, जाते-जाते मैंने शायरा से कहा

“घबराओ मत, हिम्मत रखो, तुम जितना डरोगी… वो तुम्हे उतना ही डराएगी… तुमने जहाँ से ये सब शुरू किया उसे एक बार फिर से खंगालो…  कुछ न कुछ जरूर मिलेगा.” 

मैं उसकी कोई मदद नहीं कर सकता था, और ना ही मैं उसके मज़बूरी का फायदा उठाना चाह रहा था… इसलिए मुझे वहाँ से निकल जाना ही ठीक लगा….

मेरे जाने के बाद शायरा ने कर्ण पिशाचनी की सिद्धि वाली किताब निकाली और उसे पड़ने लगी।  उसने  किताब के पन्ने पलटे ही थे कि तभी बाहर तेज हवाओं के साथ बिजली कड़की। शायरा तेजी से पन्ने पलटते जा रही थी… अचानक वो रुकी और एक पन्ना पीछे पलटा, जिसपर लिखा था, ‘कर्ण पिशाचनी का श्राप’… उस पूरे पन्ने को पढने के बाद शायरा को समझ आ गया की उसे क्या करना है, उसके पास दो रास्ते थे, पहला सम्भोग करना छोड़ दे, लेकिन रौनी की जान चली जाएगी… दूसरा अगर वो रौनी की जान बचाना चाहती है, तो उसे  खुद की जान देनी होगी.

शायरा रोज-रोज के सम्भोग के पीड़ा से बचना तो चाहती थी, पर उसके लिए वो रौनी को मरने नहीं दे सकती थी… इसलिए उसने अपने प्यार को बचाने के लिए, खुद को खत्म करने का फैसला किया। घड़ी में 12 बजने ही वाले थे , पर उससे पहले शायरा को कर्ण पिशाचिनी को अपनी बलि देना था, ताकि इनसभी चीजो से मुक्ति मिले।  इसलिए शायरा चाकू से अपनी नस काट ही रही थी, कि इतने में वहां कर्ण पिशाचिनी आ गयी और दूसरी तरफ दरवाजे पर रौनी खड़ा था।

कर्ण पिशाचिनी बोली

“ये गलती मत कर, तुझे जिन्दा रहना होगा? तू इस तरह अपनी जान नहीं दे सकती.” 

उधर रौनी बार-बार door बेल बजा रहा था… शायरा समझ चुकी थी, कि कर्ण पिशाचिनी उसे बातो में इसलिए उलझा रही थी… ताकि 12 बजे के बाद वो रौनी को मार सके और उसे इसलिए जिन्दा रखना चाहती थी…. ताकि आने वाले चंद्रग्रहण पर वह फिर से शायरा के शरीर को अपना, अपनी सिद्धि प्राप्त कर सके, और अगर उससे पहले शायरा की मौत हुई तो उसे फिर से अपने किताबो के दुनिया में वापस जाना होगा, जब तक की कोई उसे दोबारा सिद्धि कर  न बुलाये….

इसलिए शायरा ने खुद को ख़त्म करना ही सही समझा, बाहर रौनी बार-बार दरवाजे पर धक्का दे रहा था… ताकि किसी भी तरह वह दरवाजा तोड़ अन्दर आ सके, इधर कर्ण पिशाचनी जोर-जोर से चीखी जा रही थी…. इतने में शयरा की नज़र घड़ी पर गयी, जिसमें 12 बजने में सिर्फ एक मिनट बचे थे… रौनी किसी भी तरह दरवाजा तोड़ने में कामयाब हो गया और अंदर आ गया, उसके अंदर आते ही कर्ण पिशाचनी उसके तरफ बढ़ी  और अपने हाथ से उसके गले को पकड़ लिया। पर इससे पहले की वो रौनी को कोई नुकसान पहुंचा पाती, शायरा ने खुद की नस काट ली।

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शायरा के नस काटते ही कर्ण पिशाचिनी ऐसे चिल्लाने लगी जैसे कोई उसे जिंदा जला रहा हो… उसका पूरा शरीर काले धुएं में बदल गया, और वो वापस उसी किताब में समां गयी…  रौनी भी उसके चंगुल से छूट गया और सीधे भागते हुए शायरा के पास पहुंचा । शायरा को खून में लथपथ देख रौनी फूट-फूट के रोने लगा। शायरा अब इस दुनिया से जा चुकी थी। रौनी ने शायरा को बाहों में भर बस इतना कहा।

“शायरा तुमने मेरे लिए अपनी जान दे दी और मैं तुम्हे ही गलत समझता रहा था! हो सके तो मुझे माफ़ कर देना। मैंने तुमसे ही प्यार किया है और मैं तुमसे ही प्यार करता रहूँगा.”

रौनी ने शायरा के प्यार को समझने में कुछ ज्यादा ही देर कर दी। कहते है शायरा कि आत्मा आज भी मुक्त नहीं हुई और वो आज भी उस किताब की निगरानी करती है ताकि कल को कोई और कर्ण पिशाचिनी के श्राप को ना भोगे।

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